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IFSC, NEFT, RTGS

आधुनिक बनिये और अपने पैसे को जानिये। एन.ई.एफ़.टी. और आर.टी.जी.एस. क्या होता है ? (What is your IFSC No….?)

उन नंबरों के बारे में जिनसे सब परेशान रहते हैं।

आजकल आपको बहुत सारी वित्तीय कंपनियों, बैंकों, म्यूचयल फ़ंड या कोई बांड कंपनियों से पत्राचार करती होंगी जिसमें वो आपके सुरक्षित नंबरों की जानकारी लेती हैं जैसे कि माईकर, आई.एफ़.एस.सी, एन.ई.एफ़.टी., आर.टी.जी.एस., आपका फ़ोन नंबर और भी बहुत कुछ पुछते हैं। लेकिन क्यों ? क्योंकि आज की बैंकिंग प्रणाली हमलोगों को ऑनलाईन एकाऊँट को उपयोग करने के लिये प्रेरित कर रहे हैं। डाइनोसोरस जैसे लुप्त हो गये वैसे अब कुछ ही दिनों में चेक भी बैंकिंग प्रणाली से लुप्त हो जायेंगे।

पर अब आपको करना क्या होगा ये नंबर कहाँ से मिलेगा, आप अपनी चेकबुक खोलिये और उसमें चेक पर नीचे की तरफ़ देखना होगा। माइकर नंबर - MICR (Magnetic Ink Character Recognition) - यह नौ नंबरों का कोड होता है जो कि चेक में चेक नंबर के आगे लिखा होता है। जो कि इस प्रकार होता है - पहले तीन नंबर होते हैं शहर के लिये जहाँ आपका बैंक एकाऊँट है। अगले तीन नंबर आपके बैंक के होते हैं और आखिरी के तीन नंबर बैंक ब्रांच के होते हैं।

आई.एफ़.एस.सी. (IFSC Code - Indian Financial System Code) - यह एन.ई.एफ़.टी. याने कि राष्ट्रीय इलेक्ट्रानिक वित्तीय लेनदेन (National Electronic Fund Transfer)  के काम में आता है। यह ११ अक्षरों और नंबरों तक का हो सकता है। पहले चार अक्षर आपके बैंक के कोड होते हैं जो कि आसानी से आप भी पहचान सकते हैं।  उदाहरण के लिये BOB - बैंक ऑफ़ बड़ौदा, पाँचवा अक्षर अधिकतर जीरो होता है। आखिरी के छ: नंबर बैंक की शाखा के पहचान के लिये होते हैं।

उपयोग -

अगर आपने कोई म्यूचयल फ़ंड खरीदा है और उसका डिविडेन्ड घोषित किया गया है और आपने अगर अपने वित्तीय संस्थान में यह कोड बता रखा है तो आपको चेक नहीं आयेगा, सीधे आपके बैंक में डिविडेन्ड जमा हो जायेगा। और उसकी एक प्रति आपके पास आ जायेगी कि राशि बैंक में जमा कर दी गई है।  तो आप चेक जमा करने की परेशानी से बच गये और पूरी वित्तीय प्रणाली भी आसान हो गई।

कार्य कैसे करता है -

बैंकें आजकल आधुनिक सुविधाओं का उपयोग कर रही हैं, जो कि चेक की जगह इलेक्ट्रानिक है, और सुविधाजनक है। फ़ंड हाऊस जिसने डिविडेन्ड घोषित किया है वह अपने बैंक को अपने ग्राहक के एकाऊँट नंबर, आई.एफ़.एस.सी. कोड के साथ राशि का विवरण दे देते हैं। फ़िर वह बैंक रिजर्व बैंक को यही संदेश भेज देता है। जहाँ कि इस तरह के सारे संदेशों को प्राप्त किया जाता है और भेजा जाता है। फ़िर रिजर्व बैंक सभी संदेशों को जिन बैंकों में भेजना होता है वहाँ वह संदेश प्रेषित कर देता है। और आपका एकाऊँट में पैसा जमा हो जाता है। खाते में राशि जमा होने के लिये, इस सेवा में १ से २ दिन लगते हैं । NEFT सेवा अभी RBI की तरफ़ से नि:शुल्क है और कुछ बैंकें अब इसके ऊपर न्यूनतम  शुल्क राशि ले रही हैं।

आर.टी.जी.एस. - (RTGS - Real Time Gross Settlement) - यह वित्तीय लेनदेन के लिये त्वरित सेवा है। जो कि केवल २ घंटे के अंदर एक बैंक से दूसरे बैंक में राशि जमा कर देती है। इसके लिये आपको अपनी बैंक की शाखा में एक आवेदन देना होता है जिसमें आपको जो जानकारी देनी होती है, वह है - ग्राहक का नाम, जिसके खाते में पैसा जमा करना है, ग्राहक का बैंक और शाखा की जानकारी और उसका शहर, ग्राहक का एकाऊँट नंबर। और इसके लिये रिजर्व बैंक के शुल्क हैं २५ रुपये और बैंकों के अपने अपने अलग शुल्क हो सकते हैं।

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बचत बैंक खाता, सेवा शुल्क

बचत खाते में औसत राशि का क्या मतलब होता है और इसकी गणना कैसे की जाती है ?? (What is Average Balance in Saving Account.. and calculations )

बचत खाते में औसत राशि का क्या मतलब होता है और इसकी गणना कैसे की जाती है ?? (What is Average Balance in Saving Account.. and calculations )

आजकल लगभग सभी बैंकों के बचत खातों में औसत राशि रखना होती है।

पहले यह न्यूनतम राशि होती थी। पर बैंकें यह औसत राशि की गणना कैसे करती हैं, आपको यह पता है, आईये देखते हैं -

औसत राशि - एक तिमाही में आपने रोज जो भी बैलेन्स अपने बचत खाते में रखा है, उस तिमाही के बैलेन्स का औसत औसत राशि होती है।

आईये एक उदाहरण द्वारा इसे देखते हैं -

मान लीजिये कि किसी बैंक में औसत राशि बचत खाते के लिये ५००० रुपये है एक तिमाही के लिये  -

जनवरी माह में -

१ जनवरी को खाते में बैलेन्स है ५००० रुपये।
५ जनवरी को सैलेरी जमा हुई २५००० रुपये तो बैलेन्स हुआ ३०००० रुपये।
१० जनवरी को खाते में से आपने २०००० रुपये निकाल लिये तो बैलेन्स हुआ १०००० रुपये।
१५ जनवरी को खाते में से फ़िर १०००० रुपये निकाल लिये तो बैलेन्स हुआ ० रुपये।

फ़िर फ़रवरी में -

५ फ़रवरी को सैलेरी जमा हुई २५००० रुपये तो बैलेन्स हुआ २५००० रुपये।
१० फ़रवरी को खाते में से आपने २०००० रुपये निकाल लिये तो बैलेन्स हुआ ५००० रुपये।
१५ फ़रवरी को खाते में से फ़िर ५००० रुअप्ये निकाल लिये तो बैलेन्स हुआ ० रुपये।

फ़िर मार्च में -

५ मार्च को सैलेरी जमा हुई २५००० रुपये तो बैलेन्स हुआ २५००० रुपये।
१० मार्च को खाते में से आपने २०००० रुपये निकाल लिये तो बैलेन्स हुआ ५००० रुपये।
१५ मार्च को खाते में से फ़िर ५००० रुपये निकाल लिये तो बैलेन्स हुआ ० रुपये।

लेकिन अब आप सोच रहे होंगे कि खाते में इतने दिन ० रुपये बैलेन्स रहा है अब तो इस पर चार्ज लगेगा, जो कि अलग अलग बैंकों का अलग अलग हो सकता है।

अब इस तालिका को देखिये जो भी राशि हमारे बचत खाते मे जमा हुई है या निकाली गई है और हमारी शेष राशि कितनी बचती है, तो हमारा औसत तिमाही के लिये ५००० होता है या नहीं -

औसत राशि दर्शाती निम्न तालिका दिनों की गणना से

अरे चौंकिये मत जी हाँ यह सच है कि आप की औसत राशि ५००० रुपये से भी ज्यादा हो रही है, ये कमाल है ज्यादा राशी जो कि आपके खाते में रही, इसके करण आपकी औसत राशि हो गई है ५७७७ रुपये।

लगभग सभी बैंकों द्वारा वैसे आजकल सैलेरी बचत खाता जीरो शेष राशि के साथ खोला जाता है, और आप इस तालिका को एक सामान्य खाते में जमा (Deposit) और निकासी (Withdrawal) के नजरिये से देख सकते हैं।

जल्दी से देखिये कहीं आप अपनी औसत राशि से ज्यादा राशि तो मजबूरी में नहीं रख रहे हैं इसे आप कहीं और भी उपयोग कर सकते हैं, और अगर कहीं औसत राशी कम होने जा रही है तो आप थोड़ी सी ज्यादा राशि जमाकर बैंकों के चार्जेस से बच सकते हैं जो कि १०० रुपये से १००० रुपयों तक है।

और अगर आप स्वीप इन खाते में क्या सुविधा होती है और इसे कैसे उपयोग करें देखें ।

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बचत बैंक खाता, सावधि जमा खाता

बचत खाते से ज्यादा ब्याज कैसे प्राप्त करें, स्वीप इन जमा खाता एक बेहद उम्दा रास्ता…

बचत खाता तो सबके पास होते हैं और सभी लोग उसका उपयोग करते हैं। परंतु बचत खाते में कितनी रकम रखना चहिये और कितनी उसमें से निकालनी चाहिये इस पर कभी भी सोच नहीं पाते हैं।

पर अगर आपको ऐसी सुविधा वाला बचत खाता दे दिया जाये कि आप जो भी रकम सावधि जमा खाते में है, वह आप अपने बचत खाते के माध्यम से निकाल सकते हैं तो…. आपको ज्यादा रकम अपने बचत खाते में रखना भी नही पड़ेगी और ब्याज का नुकसान भी नहीं होगा। अगर बचत खाते में रकम रखते हैं तो ३.५% ब्याज मिलता है, वो भी उस न्यूनतम शेष राशि पर जो कि महीने की ११ से ३० तारीख के मध्य आपके बचत खाते में होगी।

इस तरह की सुविधा क्या सभी बैंकों में उपलब्ध है, जी हाँ लगभग सभी बैंकों में यह सुविधा उपलब्ध है। जिसे सुपर सेविंगस या फ़्लेक्सी फ़िक्स डिपोजिट नाम दिया गया है, अलग अलग बैंकों में अलग अलग नाम हो सकते हैं।

मैंने लगभग सभी राष्ट्रीयकृत बैंकों और निजी बैंकों में इस तरह के जमा खाते का विश्लेषण किया और पाया कि सुविधा तो सभी दे रहे हैं पर ग्राहक का ज्यादा ध्यान केवल आई.डी.बी.आई. बैंक रख रहा है।

पहले यह देखते हैं कि स्वीप इन होता क्या है और कैसे काम करता है -

स्वीप इन सावधि जमा खाता - जो कि बचत खाते से जुडा होता है और कुछ निश्चित रकम होने के बाद उसके ऊपर की रकम अपने आप या कुछ औपचारिकताएँ पूरी करने के बाद सावधि जमा खाते के रुप में बना देता है। इस सावधि जमा खाते को आप अपने बचत खाते से ही संचालित कर सकते हैं। सरल तरीके से यह समझ सकते हैं कि सावधि जम खाते को आप अपनी सुविधा अनुसार अपने बचत खाते से संचालित कर सकते हैं।

इससे फ़ायदा यह है कि आपको ज्यादा रकम अपने बचत खाते में नहीं रखनी पडती है, ऊपर की राशि सावधि जमा खाते में चली जायेगी और आप अपनी जमाराशि पर ज्यादा ब्याज पायेंगे।

हाँ उस बचत खाते में न्यूनतम राशि कुछ ज्यादा हो जाती है और् उसके बाद की  राशि ही सावधि जमा खाते में जाती है, और जब भी आप चैक या ए.टी.एम. से पैसा निकालते हैं यह अपने आप एक हजार रुपये के मल्टीपल में सावधि जमा खाते से बचत खाते में आ जाती है और उस रकम पर जितना भी ब्याज होता है वह भी बचत खाते में जमा हो जाता है।  हाँ एक वित्तीय वर्ष में पाँच हजार या उससे ज्यादा ब्याज अगर हो जाता है तो बैंक उस पर टी.डी.एस. जरुर काटेगा।

एक उदाहरण देखते हैं -
अगर आपके बचत खाते में ५०,००० रुपये आपने रखे हें तो आपको एक साल का ब्याज मिलेगा लगभग १७५० रुपये।  वही अगर आप इसे स्वीप इन करवाते हैं तो २५०० रुपये न्यूनतम राशि आपको बचत खाते में रखना होगी जिस पर ब्याज होता है लगभग ८७ रुपये और् बाकी ४७५०० रुपये पर ब्याज एक वर्ष के लिये लगाया है तो आता है ६.५% से ३०८७ रुपये। लगभग १४२५ रुपये का फ़ायदा और् अगर यह सावधि जमा ४७५०० वाली आप एक साल बाद निकालते नहीं हैं आपने ज्यादा समय की जमा  बनायी है तो ज्यादा ब्याज दर मिलेगी, बिल्कुल  साधारण जमा खाते की तरह।

बचत खाता
५०००० - १ वर्ष - ३.५% - १७५० रुपये

बचत खाते में न्य़ूनतम राशि पर ब्याज-

२५०० - १ वर्ष - ३.५% - ८७ रुपये

सावधि जमा खाते में रखने पर ब्याज
४७५०० - १ चर्ष - ६.५% - ३०८७ रुपये
——
३१७५ रुपये
——
फ़ायदा १४२५ रुपये

यह गणना मैंने आई.डी.बी.आई. की स्कीम के हिसाब से की है, क्योंकि यह मेरी मनपसंद स्कीम है। बाकी सारे बैंक ग्राहक को बेवकूफ़ बनाते हैं। ऐसे खाते में न्यूनमतम राशि भी ज्यादा होती है कम से कम २५००० रुपये नहीं तो भारी जुर्माना भरना पड़ता है १००० रुपये त्रैमासिक अगर आप औसत राशि अपने बचत खाते में नहीं रख पाते हैं तो, मगर आई.डी.बी.आई. में ऐसा नहीं है, हाँ स्वीप इन जमा खात खुलवाने के लिये हर बार आपको शाखा में जरुर जाना पड़ेगा और एक और फ़ायदा है आई.डी.बी.आई. में - बाद के जमा खाते की रकम पहले निकलती है जिससे आपके पुराने जमाखाते पर ज्यादा ब्याज बनते जाता है। (Last in First out)

बाकी सभी बैंकों में पहले बनी हुआ जमा खाते की रकम पहले निकासी होती है (First in First out) जिससे आपका जमाराशि का समय ज्यादा नहीं हो पाता है।

और भी कोई सवाल हो तो आप यहाँ टिप्पणी करके पूछ सकते हैं।

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अग्रिम खाते, अधिविकर्ष खाते, ऋण खाता

नकदी ऋण खाते (Cash Credit Account), अधिविकर्ष / ओवरड्राफ्ट खाते

नकदी ऋण खाते (Cash Credit Account):

व्यापारिक खातों में व्यापार चक्र के दौरान ग्राहक को दिन में बैंक से किसी भी समय ऋण की जरूरत पड़ सकती है। इस प्रयोजन के लिये बैंक कार्यशील पूंजी की आवश्यकता के लिए एक लिमिट दे सकती है जिसे खाते के रूप में इस्तेमाल किया जा सकता है, ऐसे खातों को नकदी ऋण खाता कहा जाता है।

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सामान्यतया नकद ऋण खाते में व्यवसायी को व्यापार के परिचालन के लिये आवश्यक पूँजी के लिए ऋण की मंजूरी दी जाती है जिसकीसीमा (Limit) बैंक द्वारा तय होती है। प्राथमिक प्रतिभूति के तौर पर व्यापारी का स्टाक बंधक होता है। उधारकर्ता को हर महीने स्टाक कालेखाजोखा बैंक को प्रस्तुत करना होता है। उधारकर्ता हर महीने स्टाक का लेखाजोखा बैंक को देता है उसी के आधार पर बैंक हर महीने उसकेखाते की लिमिट तय करता है जो कि अलग अलग हो सकती है। मार्जिन तय होता है स्टाक के ऊपर अग्रिम खाते में रकम देने के लिए। इस मार्जिन को कम करने के बाद स्टाक के मूल्य की गणना हर महीने की जाती है।

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इसका गणना का सूत्र निम्न प्रकार है -

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अधिकतम स्वीकार्य सीमा = स्टॉक वैल्यू * (100 - मार्जिन) / 100

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स्वीकृत लिमिट और स्टाक का मूल्य (मार्जिन की राशि कम करने के बाद) के बीच की न्यूनतम राशि ड्राईंग पावर होती है। उस खाते को ड्राईंग लिमिट के भीतर ही उस महीने के लिए संचालित किया जा सकता है भले ही उसकी स्वीकृत लिमिट कुछ भी हो

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नकदी ऋण खातों की स्वीकृत सीमा की हर साल बैंक द्वारा समीक्षा होती है।

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अधिविकर्ष / ओवरड्राफ्ट खाते:

जब चालू खाता धारक को बैंक उसके खाते में मौजूद रकम से ज्यादा निकालने की अनुमति देता है, इस तरह के अग्रिम को अधिविकर्ष /ओवरड्राफ्ट कहा जाता है। बैंकर इस अधिविकर्ष / ओवरड्राफ्ट मंजूर करने के लिए किसी संपत्ति को बंधक बना सकता है। बैंकर बिना किसीबंधक संपत्ति के भी अधिविकर्ष / ओवरड्राफ्ट मंजूर कर सकता है। ओवरड्राफ्ट बैंक में बनायी गई सावधि जमा खातों पर भी लिया जा सकताहै। ऐसे अग्रिम के लिये बैंकें सावधि जमा खातों की दर से % ज्यादा ब्याज दर लेती हैं, इसका पीएलआर से कोई संबंध नहीं होता है।

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उदाहारणार्थअगर सावधि जमा खाता की ब्याज दर .५०% है तो अग्रिम की ब्याज दर १०.५०% होगी, यह अलग अलग बैंकों ओर वित्तीय संस्थानों में अलग अलग हो सकती हैं।

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प्रतिभूति (Security) के प्रकार -

उधारकर्ता बैंक को दो प्रकार की प्रतिभूति दे सकता है, प्राथमिक सुरक्षा और संपार्श्विक सुरक्षा।

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प्राथमिक सुरक्षा (Primary Security):

प्राथमिक सुरक्षा वह सुरक्षा है जो कि अग्रिम लेने के लिये उधारकर्ता से लिया जाता है। उदाहरणार्थ नकदी ऋण खाते में स्टाक / वाहन ऋण मेंवाहन को बंधक बनाना और, आवास ऋण के मामले में आवास बंधक होता है जो कि प्राथमिक सुरक्षा के तौर पर बैंक अपने पास रखता है।

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संपार्श्विक प्रतिभूति (Collateral Security):

संपार्श्विक प्रतिभूति प्राथमिक प्रतिभूति की सुरक्षा के अतिरिक्त सुरक्षा है। उदाहराणार्थ - एलआईसी पोलिसी बैंक अपने पक्ष में रखती है,आवास ऋण के लिए। अचल संपत्ति संपार्श्विक प्रतिभूति के रूप में नकद ऋण खाते के लिए बैंकें रख सकती हैं।

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बचत बैंक खाता, सेवा शुल्क

बचत बैंक खाते में लगने वाले शुल्कों की जानकारी

न्यूनतम राशि बचत खाते में रखने पर -

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बचत खाते की न्यूनतम राशि खाते के स्वाभाव पर निर्भर होती है, अगर चैकबुक है तो ज्यादा होगी और अगर चैकबुक नहीं है तो कम होगी। अगर न्यूनतम राशि खाते में रखी गई तो उसका द्ण्ड शुल्क :माही में ग्राहक से लिया जाता है जो कि अलग अलग बैंकों में अलग अलग है। आजकल न्यूनतम राशि की जगह बहुत सी बैंकें औसत न्य़ूनतम राशि का भी उपयोग कर रहे हैं।

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उदाहरणार्थ -

चैकबुक वाले बचत खाते में न्य़ूनतम राशि है - १००० रुपया अगर राशि इससे कम या जितनी बार कम होती है तो उतनी ही बार :माही में दण्ड शुल्क वसूला जायेगा। प्रति माह शुल्क ५० रुपये से ज्यादा नहीं हो सकता

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बिना चैकबुक वाले बचत खाते में न्यूनतम राशि है - ५०० रुपया तो लगने वाल दण्ड कुछ कम होगा परंतु नियम वही होगा।

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दण्ड शुल्क लेने के हर बैंक के अलग अलग नियम होते हैं। और ये माह में पहली तारीख से आखिरी तारीख के बीच किसी भी तारीख में न्य़ूनतम राशि से कम होने पर लगेगा। भले ही उसके बाद खाताधारक कितना भी रुपया खाते में जमा करे।

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औसत न्यूनतम राशि के नियम में त्रैमासिक औसत रखना पड़ता है, जैसे कि अगर चैकबुक बचत खाते में न्य़ूनतम राशि १००० रुपया है तो वह बैलेन्स शून्य भी रख सकता है और एक लाख भी बस उसका औसत त्रैमासिक १००० रुपया होना चाहिये, आधुनिक कोर बैकिंग वाले बैंके लगभग यही अपना रहे हैं और इसका दण्ड शुल्क त्रैमासिक १०० रुपया है। बिना चैकबुक वाले बचत खाते में शुल्क कुछ कम हो सकता है।

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बचत खाते में किये जाने वाले लेनदेन की सीमा -

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बचत खाते में :माही में साधारणतया: रुपया निकालने की सीमा अधिकतम २५ लेनदेन होती है। अगर इससे ऊपर लेनदेन किया जाता है तो हर बैंक के अपने अपने सेवा शुल्क हैं।

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बचत खाते के निष्क्रिय होने पर -

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बचत खाते में अगर एक साल तक कोई भी व्यवहार नहीं किया जाता है तो बैंक उस खाते को निष्क्रिय खाते में बदल देती है और उसका दण्ड शुल्क भी खाते में नामे कर लेती है। इस प्रकार के बचत खाते पर नियमित ब्याज दिया जाता है, जो कि साधारण बचत खाते में दिया जाता है।

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बचत खाते में विड्राल फ़ोर्म की लिमिट -

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नकद आहरण पर्ची के द्वारा बचत खाते से केवल दस हजार रुपये तक ही निकाल सकते हैं वह भी दिन में केवल एक बार अगर उससे ज्यादा रकम नकद आहरित करना हो तो चैक से या फ़िर लूज चैक से ही आहरित कर सकते हैं।

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लूज चैक का सेवा शुल्क -

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व्यक्तिगत बचत खाते में लूज चैक का सेवा शुल्क लगभग एक रुपया प्रति चैक है, माइकर या नान माइकर चैकों के लिये यही शुल्क है। शुल्क बैंकों में अलग अलग हो सकते हैं।

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हस्ताक्षर सत्यापित करने के लिये सेवा शुल्क -

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लगभग सभी बैंकें हस्ताक्षर सत्यापित करने के लिये २५ रुपया प्रति खाता धारक सेवा शुल्क लेती हैं।

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खाता विवरण की नकल के लिये शुल्क (Issue of duplicate statement)-

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पुराने विवरण के लिये - व्यक्तिगत बचत खाते में खाता विवरण की नकल का शुल्क सामान्यतया: ४० रुपया पहले पेज के लिये, दस रुपया उसके बाद के पेजों के लिये होता है। पर आजकल कोर बैंकिंग में बैंकें शुल्क ज्यादा लेने लगी हैं।

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ताजा विवरण के लिये - व्यक्तिगत बचत खाते में खाता विवरण की नकल का शुल्क सामान्यतया: २५ रुपया होता है।

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खाता बंद करने के लिये सेवा शुल्क -

व्यक्तिगत बचत खाता अगर एक वर्ष के पहले बंद होता है तो सामान्यतया: २० रुपया शुल्क लिया जाता है।

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सभी सेवा शुल्कों पर सेवाकर १०.३% देय होता है।

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अग्रिम खाते, ऋण खाता

ऋण के प्रकार

ऋण के प्रकार-

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सुरक्षित ऋण -
एक सुरक्षित ऋण इस प्रकार का ऋण होता है जिसमें उधारकर्ता किसी संपत्ति को ऋणदाता के पास बंधक रखता है। जैसे कि कार या घर या कोई और संपत्ति।
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बंधक ऋण एक बहुत ही आम ऋण लिखत है, जिसे कई लोगों द्वारा आवास खरीदने के लिए प्रयोग किया जाता है। इस व्यवस्था से प्राप्त धन सम्पत्ति खरीदने के लिए प्रयोग किया जाता है। हालांकि वित्तीय संस्थाएँ घर के कागज अपने नाम पर बंधक रखते हैं जब तक कि ऋण का पूर्ण भुगतान नहीं होता है। ऋण लेने के बाद अगर उधारकर्ता ऋण का भुगतान नहीं कर पाता है तो बैंक के पास उस घर पर अधिकार कर बेचने का कानूनी अधिकार होता है।
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वैसे ही अगर नई या पुरानी कार खरीदने के लिये ऋण लिया जाता है तो बैंक उसी कार को दृष्टिबंधक बनाकर रखता है, बिल्कुल वैसे ही जैसे बैंक संपत्ति को दृष्टि बंधक बनाकर रखता है। ऋण की अवधि सामान्यत: काफी कम होती है - अक्सर गाड़ी के उपयोगी जीवन (life) के आधार पर। बैंकों में ऑटो ऋण दो प्रकार के होते हैं, प्रत्यक्ष ऋण और अप्रत्यक्ष ऋण। प्रत्यक्ष ऑटो ऋण वह होता है जहाँ बैंक सीधे एक उपभोक्ता को ऋण देता है। अप्रत्यक्ष ऑटो ऋण वह है, जहां बैंक या वित्तीय संस्थान और उपभोक्ता के बीच एक मध्यस्थ के रूप में एक कार डीलर काम करता है.
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प्रतिभूतियों के ऊपर ऋण विशेष प्रकार का ऋण है जिसमें ऋणदाता उधारकर्ता के शेयर हानि होने पर या पर्याप्त मार्जिन मनी जो कि बाजार के साथ कम ज्यादा होती रहती है, जमा कराने पर बेच सकता है, उधारकर्ता इस ऋण से जोखिम को कम करने के लिए ओप्शन या अन्य हेजिंग रणनीतियों का उपयोग करता है जिससे ऋणदाता का जोखिम कम होता है।
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असुरक्षित ऋण -
असुरक्षित ऋण वह ऋण है जिसमें उधारकर्ता को अपनी परिसंपत्तियों को सुरक्षित नहीं रखना होता हैं। विभिन्न वित्तीय संस्थानों से यह मौद्रिक ऋण अलग अलग योजनाओं के अंतर्गत उपलब्ध होता है:
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- क्रेडिट कार्ड ऋण
- व्यक्तिगत ऋण
- अधिविकर्ष बैंक खाता
- विभिन्न ऋण सुविधाएँ
- कॉर्पोरेट बॉण्ड

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इन ऋणों पर लगने वाली ब्याज दरें अलग अलग ऋणदाता और उधारकर्ता के आधार पर भिन्न भिन्न हो सकती है। ये कानून द्वारा विनियमित भी हो सकता है ओर नहीं भी हो सकती हैं।

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अग्रिम खाते -

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मूलतः अग्रिम खाते दो प्रकार के होते हैं अर्थात:

1) नये व्यापार को शुरु करने के लिए उपकरणों की खरीद के लिए या मौजूदा व्यापार का विस्तार करने के लिए, बैंकें इसके लिए ऋण देती हैं जो कि एक निश्चित अवधि के लिए दिया जाता है और यह निश्चित अवधि में भुगतान करना होता है, जिसे समान किस्त में चुकाना होता है, और

2) दैनिक कारोबार करने के लिए परिचालन पूंजी की जब भी उधारकर्ता को जरुरत हो वह ऋण ले सकता है और जब भी पूंजी हो वापस जमा कर सकता है वह इस खाते में बिक्री से होने वाली आय जमा कर सकता है और कच्चे माल की खरीद को पूरा करने के लिए उधार ले सकता है। अपने दैनिक कारोबार को करने के लिये उसे इसी खाते का उपयोग करने की बाध्यता होती है।

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ऋण ग्राहकों को सुरक्षा के साथ या बिना किसी सुरक्षा के विशेष प्रयोजन के लिए दिए जाते हैं|

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ऋण खाता, सावधि जमा खाता

सावधि जमा खाते और ऋण खाते के बारे में

सावधि जमा खाता खोलने की जानकारी

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आमतौर पर बचत बैंक खाते खोलते समय जो जानकारियां दी जाती हैं वही जानकारियां सावधि जमा खाता के लिये चाहिये होती हैं। हालांकि 10,000 रुपये से कम जमा राशियों के लिये फ़ोटो की आवश्यकता नहीं होती है। इसके अलावा पैन नंबर की आवश्यकता 50,000/- रुपये या इससे ज्यादा नकद जमा किये जाने पर ही होती है।

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सावधि जमा - विभिन्न उत्पाद

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बैंकों ने ग्राहकों की आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए भिन्नरूपों में बुनियादी सावधि जमा शुरू की हैं। लचीली जमा योजना ऐसी ही एक नवीन योजना है। इस योजना में सावधि जमा छोटी राशि की इकाइयों में विभाजित हो जाती है जमा लेखा कार्यों के लिये। इससे उपभोक्ता को यह सुविधा मिलती है कि वह अपनी सावधि जामा खाते में से किसी भी समय यूनिट समयपूर्व आहरण कर सकता है और बाकी की बची हुई यूनिट पर अनुबंधित ब्याज दर कमायेगा।

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जमा खाते आमतौर पर दो तरह के होते हैं –

१. साधारण ब्याज वाले

साधारण ब्याज वाले सावधि जमा खाते साधारणतया कम समय के लिये होते हैं, आमतौर पर १ वर्ष या उससे कम, पर हरेक बैंक की अपनी अवधि हो सकती है।

२. मिश्रधन ब्याज वाले

मिश्रधन ब्याज वाले सावधि जमा खाते कम से कम एक वर्ष और ज्यादा से ज्यादा दस वर्ष के होते हैं, इसमें त्रैमासिक अवधि में ब्याज जमा खाते में जमा कर दिया जाता है।

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वैसे आजकल कई बैंकों ने नियम बना दिया है कि अगर ग्राहक एक वर्ष के बाद सावधि जमा खाते से समय पूर्व भुगतान लेता है, तो उसे समय पूर्व भुगतान लेने का दण्ड नहीं देना पड़ता है। यह नियम भी हरेक बैंक में अलग अलग हो सकता है।

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महत्वपूर्ण नोट :

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कृप्या अपने बैंक के साथ जमा खाता में नामांकन फार्म भरने भूलें।

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ऋण खाते के बारे में जानकारी -

ऋण एक प्रकार से बैंक से लिया गया कर्ज है। सभी ऋण लिखतों की तरह, कुछ समय के बाद ऋणदाता और उधारकर्ता के बीच वित्तीय आस्तियों के पुनर्वितरण होता है।.

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ऋण में, उधारकर्ता शुरू में ऋणदाता से राशि लेता है, जिसे मूलधन कहते हैं जो कि ऋणदाता देता है, इसे वापस भुगतान करने के लिये ऋणदाता उसकी एक समान राशि हर महीने उधारकर्ता को चुकाने के लिये नियत समय पर बाध्य होगा। आमतौर पर ऋण नियमित किश्तों में, या आंशिक चुकौती में वर्ष में किया जाता है, सभी किस्त समान राशि की होती है।

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सामान्यतः ऋण भविष्य की एक तय राशि के लिये दिया जाता है, जो कि ब्याज के ऊपर ऋण जाना जाता है, जो कि ऋणदाता को ऋण देने के लिये प्रोत्साहित करता है। कानूनन ऋण में, इन सभी दायित्वों और प्रतिबंधों को अनुबंधित कर लिया जाता है जो कि समान रुप से उधारकर्ता के लिये भी लागू होती है, ओर वह भी अनुबंध में बँधा रहता है। हालांकि यह अनुच्छेद मौद्रिक ऋण पर केन्द्रित होता है, और किसी सामग्री को बंधक रखने की मांग कर सकता है। ऋण देना वित्तीय संस्थाओं के प्रमुख कार्यों में से एक है। अन्य संस्थाओं के लिए, ऋण अनुबंधों के बांड जारी करना धन प्राप्त करने का एक विशिष्ट स्रोत है।

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चालू खाते, सावधि जमा खाता

चालू खाते एवं सावधि जमा खाते के बारे में

चालू खाते के बारे में जानकारी -

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चालू खातों मुख्य रुप से व्यावसायिक उद्देश्यों के लिए बनाए गये हैं जिन्हें चेक के द्वारा संचालित किया जाता है। इसमे कितने भी लेनदेन एक दिन में किये जा सकते हैं इसकी कोई सीमा निश्चित नहीं है जैसी कि बचत खाते में है। चालू खाते में बैंकें आम तौर पर एक उच्च न्यूनतम शेष राशि बनाए रखने के लिए जोर देते हैं। आम तौर पर बड़ी संख्या में लेनदेन एवं खाते के संतुलन की अस्थिर प्रकृति देखते हुए बैंकें चालू खाता संचालन के लिए कुछ सेवा शुल्क लेती है।

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रिजर्व बैंक के निर्देश के अनुसार बैंकों को चालूखाते की शेषराशि पर ब्याज का भुगतान करने की अनुमति नहीं है। हालांकि, खाताधारक की मौत की स्थिती में कानूनी वारिस को ब्याज का भुगतान करना होगा, मृत्यु दिनांक से समझौता होने की तारीख तक बचत बैंक जमा खाते पर लागू होने वाले ब्याज दर से भुगतान किया जाता है।

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आजकल बैंकों ने कुछ नई योजनाऐं निकाली हैं चालू खाते के लिये, जिसमें कुछ शुल्कों की छूट दी जाती है, एवं कुछ सुविधाएँ दी जाती हैं।

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सावधि जमा खाता (Fixed Deposit) -

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सावधि जमा खाते बैंकों द्वारा एक निर्दिष्ट अवधि के लिए स्वीकार किए जाते है। रिजर्व बैंक के निर्देशों के अनुसार, कम से कम 15 दिनों की अवधि के लिये जमा स्वीकार किया जा सकता है और आमतौर पर बैंक 10 साल से ज्यादा लंबी अवधि के लिए जमा स्वीकार नहीं करते।

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1> बैंक सावधि जमा पर जमा की गई अवधि के आधार पर ब्याज देते हैं और सामान्यतया: दीर्घावधि जमा राशियों पर उच्च ब्याज दर का भुगतान किया जाता है।

2> बैंकों के पास जमा राशियों पर ब्याज दर तय करने का पूरा अधिकार होता है और ब्याज दरें समय समय पर बदलती रहती हैं ये बाजार की स्थितियों पर निर्भर करती है।

3> समय समय पर ब्याज दरों में परिवर्तन से बैंक की मौजूदा जमा राशियों के भुगतान में परिवर्तन नहीं होता है।

4> बैंकें सावधि जमा के ऊपर कुछ निश्चित प्रतिशत सालाना ब्याज दर देते हैं जिसे कि कुछ ऐसे समझ सकते हैं कि ब्याज का भुगतान त्रैमासिक आधार पर होगा।

5> जमाकर्ता प्रत्येक तिमाही में या मासिक मितीकाटा मूल्य से ब्याज राशि ले सकते हैं या फ़िर उस राशि को जमा खाते में ही मिश्रधन के रुप में जमा कर परिपक्वता पर ब्याज प्राप्त कर सकते हैं।

6> रिजर्व बैंक ने अब बैंकों को 15 लाख एक करोड़ से अधिक व्यक्तिगत जमाओं के लिए ब्याज की उच्च दर को उद्धृत करने की अनुमति दे दी है।

7> बैंकों को जमाओं के समयपूर्व आहरण पर दंड लेने की अनुमति दी गई है। बैंकें आमतौर पर इस तरह की सावधि जमाओं पर पूर्ण किये हुए समय तक का ब्याज देती हैं, मतलब जितना समय सावधि जमा बैंक के पास थी। दंड काटने के बाद बची हुई राशि का भुगतान कर दिया जाता है।

8> बैंकें सावधि जमा पर मांग के उपर ऋण भी देती हैं। सावधि जमा की बकाया राशि से मार्जिन के आधार पर बैंक ऋण देती है और ऋण की ब्याज दर बैंक द्वारा निर्धारित की जाती है जो कि सभी बैंकों में भिन्न हो सकता है।

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बचत बैंक खाता

बचत खाते के बारे में -

<!–chitthajagat claim code–> <a href=”http://www.chitthajagat.in/?claim=rkoobxtd0s0h&ping=http://bankgyan.blog.co.in” title=”चिट्ठाजगत अधिकृत कड़ी”><img src=”http://www.chitthajagat.in/chavi/chitthajagatping.png” border=”0″ alt=”चिट्ठाजगत अधिकृत कड़ी” title=”चिट्ठाजगत अधिकृत कड़ी”;></a> <!–chitthajagat claim code–>

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बचत खाता :-

बचत खाता सबसे ज्यादा उपयोग होता है व्यक्तिगत और गैर वाणिज्यिक लेनदेन के लिये। रोज के बैंकिग लेनदेन में बचत खाता लोगों को मदद करता है, और इसका मुख्य उद्देश्य है कि लोग अपनी कमाई से कुछ पैसा बचत कर के भविष्य के लिये सुरक्षित रखें। बैंकें आमतौर पर बचत खाते में विशेष समयावधि में धन आहरण की संख्या निर्धारित करती हैं। बैंकें बचत खातों के लिये न्यूनतम शेष राशि भी निर्धारित करती हैं। आम तौर पर चैक बुक की सुविधा वाले बचत खातों में न्यूनतम शेष राशि थोड़ी ज्यादा होती है, गैर-चेक संचालित बचत खातों की तुलना में।

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साधारणतया: बैंकें नियम के तहत बचत खाते में अधिविकर्ष (ओवरड्राफ्ट) सुविधा नहीं देते, लेकिन आकस्मिक स्थिती में बैंकें ऐसा करने दे सकती हैं। कई बैंकें सैलेरी बचत खाते में एक महीने के वेतन के बराबर अधिविकर्ष की सुविधा देते हैं।

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कौन बचत खाता खोल सकते हैं?

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- एक व्यक्ति;

- दो या दो से अधिक व्यक्तियों के संयुक्त नामों से, जो कि देय होंगे:

* दोनों को या उन सभी को या उत्तरजीवी या बचे उनमें से

* कुछ गैर लाभ कल्याणकारी संगठनों और सरकारी विभागों को भी बैंकों में बचत बैंक खातों को खोलने की अनुमति है।

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बैंक खाता खोलने के लिए बैंक क्या पूछता है?

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बैंक में खाता खोलने के लिए व्यक्ति को अपना पहचान पत्र अपनी सही पहचान के लिये देना पड़ता है और बैंक ये भी चाहते हैं कि कोई मौजूदा खाता धारक आपका परिचय दे। बैंक अपने रिकार्ड में उस व्यक्ति की तस्वीर भी रखते हैं जिससे कभी भविष्य में पहचान हो सके। सरकारी अधिसूचना के तहत 01.11.1998 से, बैंकों को खाता धारक के खाते खोलने के समय पैन नंबर लेना होगा जो कि आयकर विभाग द्वारा जारी किया गया है। पैन नंबर ग्राहक के अभाव में निर्धारित प्रारूप में एक घोषणा देना चाहिए (फार्म नं .60 या 61 के रूप में)

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महत्वपूर्ण नोट:

कृपया खाता खोलते समय नामांकन फार्म भरें। यह खाता धारक की मृत्यु के बाद बकाया राशि के निपटान में मदद करता है।

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ग्राहक जब बचत खाता खोलता है तो उसे क्या पता होना चाहिये ?

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बैंक अधिकारियों से इसके बारे में पूछें:

* न्यूनतम शेषराशि।

* न्यूनतम शेषराशि रखने पर एवं जारी किये गये चैकों को लौटाने एवं चैक जो कि बाहरी चैकों का समाहरण पर दण्ड प्रावधान।

* बाहरी चैकों के समाहरण इत्यादि पेशकश की गई सुविधाओं और लागू शुल्क।

* दण्ड प्रावधानों का विवरण, अगर कोई सीमा हो चेकबुक और नकदी आहरण या नकदी जमा की संख्या आदि।

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ब्याज:

1/3/2003 से प्रभावी ब्याज @ 3.5% प्रतिवर्ष है। ब्याज की राशि की गणना प्रत्येक महीने के दसवें दिन से अंतिम दिन के बीच न्यूनतम राशि पर की जाती है। अधिकांश बैंकों छमाही आधार पर ब्याज का भुगतान करते हैं, परंतु अब जब से बैंकें केंन्द्रीयकृत हो गईं हैं तब से कुछ बैंकें हर तिमाही में ब्याज दे रही हैं। अभी हाल ही में वित्त मंत्रालय ने रिजर्व बैंक ओफ़ इंडिया को ब्याज गणना नई तरीके करेन के लिये अनुमोदित किया है। जिससे खाताधारक को ब्याज का फ़ायदा हो सके।

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बचत खाते की कुछ नई योजनाएँ जो कि बैंकों द्वारा अभी दी जा रही हैं -

. साधारण बचत खाता

. स्वीप इन बचत खाते

. जनता बचत खाते

. वेतन बचत खाते

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इन सब खातों में सभी बैंकों की अपनी अपनी स्कीमें हैं।

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आजकल केन्द्रीयकृत प्रणाली के होने से खाताधारक चैकबुक से बैंक की किसी भी शाखा से व्यवहार कर सकता है, और जमा एवं निकासी के लिये सेवा शुल्क सभी बैंकों के अलग अलग हैं।

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बैंकों की जानकारी

भारत में बैंकिंग

भारत में बैंकिंग बहुत सुविधाजनक और परेशानी मुक्त है। कोई भी (व्यक्ति, समूह या जो भी हो) आसानी से लेनदेन की प्रक्रिया कर सकता हैं जब भी किसी को आवश्यकता हो। बैंकों द्वारा भारत में दी जाने वाली आम सेवाएँ इस प्रकार हैं -

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* बैंक खाते: यह बैंकिंग क्षेत्र की सबसे आम सेवा है। कोई भी व्यक्ति बैंक खाता खोल सकता है जो कि बचतखाता, चालू खाता या जमा खाता कुछ भी हो सकत है।

* ऋण खाते: आप विभिन्न प्रकार के ऋणों के लिए किसी भी बैंक का रुख कर सकते हैं। यह आवास ऋण, कार ऋण, व्यक्तिगत ऋण, शेयर के विरुद्ध ऋण और शैक्षिक ऋण या कोई भी ऋण हो सकता है।

* धन हस्तांतरण: बैंकें विश्व के एक कोने से दूसरे कोने में पैसा स्थानांतरण करने के लिए ड्राफ्ट, धनाआदेश या चेक जारी कर सकते है।

* क्रेडिट और डेबिट कार्ड: सभी बैंकें अपने ग्राहकों को क्रेडिट कार्ड की पेशकश करते हैं। जो कि उत्पादों और सेवाओं को खरीदने के लिये या पैसे उधार लेने के लिए इस्तेमाल किया जा सकता है।

* लाकर्स : अधिकांश बैंकों के पास लाकर्स सुविधा उपलब्ध होती है जिसमें ग्राहक अपने महत्वपूर्ण दस्तावेज या क़ीमती गहने सुरक्षित रख सकता है।

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अनिवासी भारतीयों के लिए बैंकिंग सेवा:

अनिवासी भारतीयों या एनआरआई लगभग सभी भारतीय बैंकों में खाता खोल सकते हैं। अनिवासी भारतीय तीन प्रकार के खाते खोल सकते हैं:

* अनिवासी खाता (साधारण) - NRO

* अनिवासी (बाह्य) रुपया खाते - NRE

* अनिवासी (विदेशी मुद्रा) खाता - FCNR

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