चालू खाते के बारे में जानकारी -
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चालू खातों मुख्य रुप से व्यावसायिक उद्देश्यों के लिए बनाए गये हैं जिन्हें चेक के द्वारा संचालित किया जाता है। इसमे कितने भी लेनदेन एक दिन में किये जा सकते हैं इसकी कोई सीमा निश्चित नहीं है जैसी कि बचत खाते में है। चालू खाते में बैंकें आम तौर पर एक उच्च न्यूनतम शेष राशि बनाए रखने के लिए जोर देते हैं। आम तौर पर बड़ी संख्या में लेनदेन एवं खाते के संतुलन की अस्थिर प्रकृति देखते हुए बैंकें चालू खाता संचालन के लिए कुछ सेवा शुल्क लेती है।
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रिजर्व बैंक के निर्देश के अनुसार बैंकों को चालूखाते की शेषराशि पर ब्याज का भुगतान करने की अनुमति नहीं है। हालांकि, खाताधारक की मौत की स्थिती में कानूनी वारिस को ब्याज का भुगतान करना होगा, मृत्यु दिनांक से समझौता होने की तारीख तक बचत बैंक जमा खाते पर लागू होने वाले ब्याज दर से भुगतान किया जाता है।
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आजकल बैंकों ने कुछ नई योजनाऐं निकाली हैं चालू खाते के लिये, जिसमें कुछ शुल्कों की छूट दी जाती है, एवं कुछ सुविधाएँ दी जाती हैं।
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सावधि जमा खाता (Fixed Deposit) -
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सावधि जमा खाते बैंकों द्वारा एक निर्दिष्ट अवधि के लिए स्वीकार किए जाते है। रिजर्व बैंक के निर्देशों के अनुसार, कम से कम 15 दिनों की अवधि के लिये जमा स्वीकार किया जा सकता है और आमतौर पर बैंक 10 साल से ज्यादा लंबी अवधि के लिए जमा स्वीकार नहीं करते।
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1> बैंक सावधि जमा पर जमा की गई अवधि के आधार पर ब्याज देते हैं और सामान्यतया: दीर्घावधि जमा राशियों पर उच्च ब्याज दर का भुगतान किया जाता है।
2> बैंकों के पास जमा राशियों पर ब्याज दर तय करने का पूरा अधिकार होता है और ब्याज दरें समय समय पर बदलती रहती हैं ये बाजार की स्थितियों पर निर्भर करती है।
3> समय समय पर ब्याज दरों में परिवर्तन से बैंक की मौजूदा जमा राशियों के भुगतान में परिवर्तन नहीं होता है।
4> बैंकें सावधि जमा के ऊपर कुछ निश्चित प्रतिशत सालाना ब्याज दर देते हैं जिसे कि कुछ ऐसे समझ सकते हैं कि ब्याज का भुगतान त्रैमासिक आधार पर होगा।
5> जमाकर्ता प्रत्येक तिमाही में या मासिक मितीकाटा मूल्य से ब्याज राशि ले सकते हैं या फ़िर उस राशि को जमा खाते में ही मिश्रधन के रुप में जमा कर परिपक्वता पर ब्याज प्राप्त कर सकते हैं।
6> रिजर्व बैंक ने अब बैंकों को 15 लाख व एक करोड़ से अधिक व्यक्तिगत जमाओं के लिए ब्याज की उच्च दर को उद्धृत करने की अनुमति दे दी है।
7> बैंकों को जमाओं के समयपूर्व आहरण पर दंड लेने की अनुमति दी गई है। बैंकें आमतौर पर इस तरह की सावधि जमाओं पर पूर्ण किये हुए समय तक का ब्याज देती हैं, मतलब जितना समय सावधि जमा बैंक के पास थी। दंड काटने के बाद बची हुई राशि का भुगतान कर दिया जाता है।
8> बैंकें सावधि जमा पर मांग के उपर ऋण भी देती हैं। सावधि जमा की बकाया राशि से मार्जिन के आधार पर बैंक ऋण देती है और ऋण की ब्याज दर बैंक द्वारा निर्धारित की जाती है जो कि सभी बैंकों में भिन्न हो सकता है।
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